यहाँ की महिलाएं 65 साल की उमर में देती हैं बच्चों को जन्म, आखिर क्या राज़ है की हुंजा के लोग जो हमेशा जवान रहते हैं, और कभी बीमा’र नही पड़ते…

अल मसद अखबार की खबर के मुताबिक यह कोई कहानी किस्सा नही बल्कि हक़ीक़त बयानी है, हुंजा नाम के एक शहर में, जो कि पाकि’स्तान से दूर उत्तर में है, यहाँ के लोग बहुत सादा ज़िन्दगी बिताते हैं। सादगी हँसी और योगा इनकी ज़िन्दगी का मूल मन्त्र है। ये सारी चीज़ें उनके लिए एक बेहतरीन ज़िन्दगी का राज़ बन चुका है।

यहाँ के लोग 165 साल के हैं

हुंजा शहर के लोग वादियों में रहते हैं, इसे “बड़ों की वादी” के तौर पर लोग जानते है, इसका मतलब होता है “वो लोग जो तीर की तरह एक ही महाज़ में मुताहद हैं”।

हंजा के वादी में, जो की सतह समुद्र से दो हजार मीटर की बलन्दी पर है, और यह कलकत-बाल्टिस्तान एरिया से 200 किलोमीटर की दूरी पर वाके है। पाकि’स्तान से दूर उतर में है।
जदीद टेक्नोलॉजी ऐसी चीज़ें हैं जो वो नही जानते, वे ऐसे लोग हैं जो टीवी तक नहीं जानते हैं और मोटर कार की सुविधा भी उन तक नहीं पहुंची है, और ना ही वो स्मार्टफोन को ही जानते हैं जो की आज के दौर में सभी लोगों के पास मौजूद होता है।

ये लोग उत्तर पाकि’स्तान के पहाड़ी इलाके में बसते हैं, लेकिन ये लोग कोई आम लोग नही है। यह लोग बिना किसी सेहत की खराबी के कम से कम 100 साल तक जीते हैं। कुछ 120 साल तक भी जीते हैं।165 साल तक के लोग भी यहाँ मैजूद है। इन लोगो को कैं’सर, ट्यू;मर जैसी बीमारी के बारे मे कोई जानकारी नहीं है। यहाँ की औरतें 65 साल की उमर में भी बच्चे को जन्म देती हैं।

यह लोग खूब सारी खुबानी खाते हैं।

हुनजा शहर इस बात का प्रूफ है कि खान पान और जीवन बिताने के ढंग इंसानो पर कैसे असर डालती है। ये लोग बर्फीले पानी में नहा लेते हैं। भले ही बाहर का पारा 0 डिग्री सेल्सियस से कम चला गया हो।

हुंजा लोग केवल अपने हाथों से उगाए हुए साग सब्ज़ी और फल को खाते हैं। यह लोग कच्चे फल और सब्जी तिलहन, सूखे खुबानी,खास तौर से बाजरा या बिसनाह, और जौ, फलियां, अंडा दूध, और पनीर खाते हैं।

इनका रोज़ का खाना बहुत आम से होता है: नाश्ते में यह लोग अनाज,रोटी और ब्रेड के साथ ताज़े या उबला हुआ खुबानी एक कटोरा होता है।

सुबह 10 बजे एक ही तरह खाना खाते हैं, ताजी या उबली हुई सब्जी। 13-14 बजे के बीच यह लोग सूखा खुबानी का खाना खाते हैं, और गर्मी में पानी में पतला ताजा खुबानी।

आखिर में 17-19 बजे के बीच यह लोग कम्पलीट मील खाते हैं, इसमें मौसम के हिसाब से चपाति, सब्जि शामिल की जाती हैं। इसमें वह कई तरह के फल को खाते हैं, आड़ू, नाशपाती, सेब या ताजा खुबानी, मांस ना के बराबर खाते हैं, इसमें भेड़ का बच्चा या थोड़ा सा चिकन।

हंज़ा शहर के एक फर्द, जिसे राल्फ बेरचर कहते हैं, ने अपनी किताब “द हुनज़ा: वी आर अ पीपुल हू हैव नॉट डिजीज” में इन लोगों के खाने के बारे में अहम जानकारी दी हैं,

यह लोग लगभग शाकाहारी हैं

यह लोग ज़्यादा मिक़दार में कच्चे खानो का इस्तेमाल का करते हैं

उनके खान पान में फल और सब्जियां खास तौर से शामिल हैं

यह लोग सारी नैचरल चीज़े इस्तेमाल में लाते हैं।

कभी शराब नहीं पीते हैं और चीनी का इस्तेमाल नहीं करते हैं

उनके खाने में नमक बहुत कम होता है

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