16 साल पहले यह घर बनाया था,आज चारों और लाशों को देखकर, ह्रदयविदारक घटना में अब आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

मेरे हंसते-खेलते परिवार को किसी नजर लगीः डब्बली देवी
16 साल पूर्व बने आशियाने में मिली थी सारी खुशी, अब नमोनिशान नहीं
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घनसाली (टिहरी। बुधवार देर सांय को दूर छानियों से कोट गांव पहुंची डब्बली देवी और उमा सिंह सहमे और डरे हुए हैं। उमा सिंह और डबली देवी रूंधे हुए गले से रोते-रोते कहते हैं 16 साल पहले हमने यह घर बनाया था। यहां से अपने चार बच्चों की धूमधाम से शादी की। इसी घर-आंगन में नाती-पोतियों की किलकारी सुनी और आज……। कहते-कहते उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्हें तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया है। कुदरत ने उमा सिंह को बुढ़ापे में ऐसे जख्म दिए हैं जिनको भरना शायद अब असंभव है।

बुधवार तड़के घनसाली तहसील के कोट गांव के ऊपर भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन का मलबा उमा सिंह के मकान के ऊपर समा गया जिससे पूरा मकान की जंमीजोद हो गया। उमा सिंह और उनकी पत्नी डब्बली देवी कुछ दिनों से गांव से दूर महासरताल की ओर बनी अपनी छानी में रह रहे थे। वहां पर उनके गाय-भैंस, बकरी आदि पशु हैं। कुदरत के कहर के अंजाम से दूर दोनों पति-पत्नि हर रोज की तरह मवेशियों को चराने महासरताल के जंगलों में गए थे। उन्हें क्या पता था कि हंसता-खेलता परिवार गांव में अचानक की काल की ग्रास में समा गया है। बुधवार की ह्रदयविदारक घटना में उमा सिंह का मंझला पुत्र मोर सिंह, पुत्रवधु हंस देई, संजू देवी, लक्ष्मी देवी, पोता आशीष, अुतल और पोती स्वाति अकाल मौत की आगोश में चले गए। बामुश्किल एक पोती बबली किसी तरह मलबे में सकुशल जिंदा मिली। कोट गांव से करीब 20 किमी चढ़ाई पर महासरताल स्थित उमा सिंह की छानी है। गांव में घटी की इस अनहोनी से अनजान उमा सिंह को सूचना देने के लिए गांव के लोग बुधवार को वहां जाते हैं। किसी तरह उन्हें घटना के जानकारी देते हैं। वह सांय को जब गांव पहुंचते हैं तो नाजार देखकर हतप्रभ रह जाते हैं। जिस मकान में सारी खुशियां देखी थी उसका नमोनिशान मिट चुका था। गांव पहुंचते ही उमा सिंह और डब्बली देवी बेहोश हो जाते हैं। किसी तरह गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बबली ही इस घटना मे जिंदा मिली है। लेकिन वह इतनी भयभीत है कि कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। डब्बली देवी कहती हैं मेरी प्यारी बहू हंस देई का तो इस माह प्रसव होना था। कोख में पल रही संतान के बारे में दादा-दादी और परिजनों ने क्या-क्या सपने नहीं देखे थे। सब चकनाचूर हो गए हैं। डबली देवी रोक-रोककर विधाता को कोस रही हैं, आखिर किसी बात की सजा उन्हें दी। हंसते-खेलते परिवार को किसकी नजर लगी। अब सिर्फ वहां खामोशी है, उदास उमा सिंह और डब्बली देवी बस जिस जगह मकान बना था वहां टुकुर-टुकुर देखकर फूट-फूटकर रो रहे हैं।

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