रोजगार मुहैया कराने की दिशा में कसरत तेज कर दी गई है। इसके तहत राज्य में 10 हजार वन प्रहरियों की तैनाती की जानी है।

कोरोना संकट के चलते गांव लौटे प्रवासियों समेत अन्य व्यक्तियों को वन विभाग के माध्यम से रोजगार मुहैया कराने की दिशा में कसरत तेज कर दी गई है। इसके तहत राज्य में 10 हजार वन प्रहरियों की तैनाती की जानी है। इसकी प्रक्रिया शुरू करने के लिए विभाग मसौदा तैयार करने में जुट गया है। इनके मानदेय के लिए धन की व्यवस्था उत्तराखंड प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैंपा) से की जाएगी। कैंपा की अतिरिक्त वार्षिक कार्ययोजना में इसका प्रविधान किया गया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हाल में ही भौगोलिक लिहाज से राज्य के सबसे बड़े महकमे वन विभाग के माध्यम से 10 हजार व्यक्तियों को वन प्रहरी के रूप रोजगार देने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में विभाग ने कैंपा की 265 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक कार्ययोजना में इसके लिए बजट का प्रविधान किया। इस कार्ययोजना को केंद्र से हरी झंडी का इंतजार है। माना जा रहा कि राष्ट्रीय कैंपा की जल्द होने वाली बैठक में इसका अनुमोदन हो जाएगा।इसे देखते हुए विभाग अब वन प्रहरियों की नियुक्ति प्रक्रिया का मसौदा तैयार कर रहा है।
वन प्रहरियों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के साथ ही वानिकी कार्यों में तैनात किया जाएगा। फायर सीजन में वनों को आग से बचाने में भी उनकी सेवाएं ली जाएंगी। वन प्रहरी के लिए आठ हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय निर्धारित किया गया है। कैंपा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेएस सुहाग के अनुसार वन प्रहरियों की जल्द ही तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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