सरकार को इस बात पर गम्भीरता से विचार करने के लिए चिंता जाहिर करने की जरूरत है.

DEHRADUN उत्तराखंड को बने 17 साल हो गए हैं लेकिन विकास के दावों का सच कोसों दूर है. बावजूद इसके सरकार एक के बाद एक बड़े परिर्चाओं से पलायन, बेरोजगारी और तमाम सुविधाओं का हल निकालने का दावा कर रही है. इस बात को लेकर पहाड़ की मशहूर जागर सम्राट और पद्मश्री बसंती बिष्ट ने उत्तराखंड की सरकारों पर जोरदार हमला बोला है. बसंती बिष्ट का कहना है कि बीजेपी कांग्रेस दोनों ही सरकारों ने पलायन और बेरोजगारी के लिए कुछ भी नहीं किया है. उन्होंने “फूक झोपड़ी देख तमाशा कहावत” का जिक्र करते हुए सरकार पर तंज कसा है कि वर्तमान में सरकार अपनी नाकामी का जश्न मना रही है. जिसका सरकारों को कोई इल्म भी नहीं है. उन्होंने कहाकि श्रीनगर और अल्मोड़ा के लिए सरकार जो नीति बना रही है वो पहले से ही विकसित हैं सरकार अगर पहाड़ के विकास की बात करती है तो चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथोरागढ़ को विकसित करने पर विचार करे.

नहीं दिया बोलने का मौका
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित किए गए रैबार कार्यक्रम में पद्मश्री बसंती बिष्ट को बुलाया तो जरुर गया लेकिन कार्यक्रम में उनकी अनदेखी कर उन्हें अपनी बात नहीं रखने दिया गया. रैबार कार्यक्रम में पहले सेशन के दौरान जब पलायन के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी तो लोकगायक बसंती बिष्ट ने ने इस मामले पर अपने सुझाव रखने चाहे. लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया . बाद में बसंती ने बाहर आकर मीडिया से ये बात साझा करते हुए कहा कि जो लोग असल में पहाड़ों में जीवन जी कर संर्घर्ष कर रहे हैं सरकार को उनपर ध्यान देने की जरुरत है. पहाड़ो में स्वास्थ, शिक्षा की स्थिति इतनी बुरी है कि महिलाएं प्रसव के दौरान ही दम तोड़ रही हैं. उन्होंने कहा कि शहर के नजरिए से पहाड़ को देखना सरकारों के लिए घातक है. उन्होंने ने इस बात पर गम्भीरता से विचार करने के लिए चिंता जाहिर की है.

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