रोते हुए पिता ने कहा- पैसा देने के बाद लाडलों को मार डाला।एक ही ममी, पापा,एक साथ जन्मे-एक साथ मौत, एक ही अर्थी और एक साथ अंतिम संस्कार।

सतना/चित्रकूट. 6 साल के प्रियांश और श्रेयांश की निर्मम हत्या की पीछे वो टीचर ही निकला जो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। बिजनेसमैन ब्रजेश रावत के चार बच्चे थे। प्रियांश और श्रेयांश एलकेजी के छात्र थे। सभीको ट्यूशन रामकेश यादव ही पढ़ाता था। इस कारण से वो परिवार से घुलमिल गया था। इसी दौरान उसने परिवार की आर्थिक स्थिति का भी पता लगा लिया। इसके बाद उसने चचेरे भाई पिंटू को बताया कि रावत परिवार के पास बहुत पैसा है और इसके बाद मासूमों की किडनैपिंग का प्लान बनाया गया।

– टीचर कामकेश ने अपने भाई पिंटू को जब रावत परिवार की आर्थित स्थिति के बारे में बताया तो दोनों ने प्लान बनाया कि अगर बच्चों का अपहरण किया जाए तो बहुत सारा पैसा मिल जाएगा। इसके बाद पिंटू ने पदम शुक्ला से संपर्क कर साजिश रची। पदम का छोटा भाई विष्णुकांत बजरंग दल का क्षेत्रीय संयोजक है। पदम ने ही 6 लोगों की गैंग बनाई। सभी को अलग-अलग काम दिया गया और इस तरह नियोजित तरीके से बच्चों की किडनैपिंग की गई। ट्यूशन टीचर रामकेश ही सबसे अहम कड़ी था।

 बेबस पिता बोले- दोषियों को जल्द सजा मिले
– बच्चों की हत्या के बाद परिजनों का बुरा हाल है। बेबस पिता ने कहा कि मैंने फिरौती दे दी थी। उसके बाद भी बच्चों को हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से मार दिया। सभी दोषियों के जल्दी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हत्यारों को इस समाज में रहने का हक नहीं। मेरे बच्चों की बलि बेकार नहीं जानी चाहिए।

एक साथ जन्मे-एक साथ मौत
– प्रियांश और श्रेयांश का जन्म एक साथ हुआ था। दोनों की हत्या भी एक साथ हुई और फिर अंतिम संस्कार भी। अपराधियों ने पूछताछ में बताया कि बच्चों को कार में अचेत करने के बाद लोहे की जंजीर से उनके हाथ-पैर बांधे। फिर मच्छरदानी में पत्थर रखकर उसे बच्चों की कमर से बांधकर नदी में फेंक दिया। अपराधियों ने ये भी बताया कि जब तक बच्चे सुरक्षित थे, दोनों मोबाइल पर गेम खेलते रहते थे। बच्चे शांत रहें और जिद न करें इसके लिए उन्हें मोबाइल दे दिए गए थे।

ऐसे हुआ घटनाक्रम
12 फरवरीः स्कूल बस से लौटते वक्त गन प्वाइंट पर आरोपियों ने बच्चों को स्कूल बस से अगवा किया।
14 फरवरीः फिरौती के लिए आरोपियों ने फोन किया।
20 फरवरीः एक रागहीर के फोन से फिर फिरौती की मांग हुई। इसी दिन ब्रजेश के द्वारा फिरौती की रकम पहुंचा दी गई।
21 फरवरीः बदमाशों ने फोन कर कहा भरतकूप के पास बच्चे मिल जाएंगे।
22 फरवरीः मप्र पुलिस एक आरोपी तक पहुंची।
23 फरवरीः एक आरोपी के सहारे बाकियों की धरपकड़ पुलिस ने शुरू की। सभी 6 आरोपी पकड़ में आ गए। इन्हीं से पता चला कि बच्चों की हत्या कर दी गई है।

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