ग्यारह गाँव हिन्दाव अखौडी के84 वर्षीय शिवजनी,उनकी पत्नी 83 वर्षीय गजला देवी और सहयोगी 80 वर्षीय गिराज ने आखिर हमारा निवेदन स्वीकार कर लिया।

आखिरकार केदार नृत्य फिर जी उठा …………………….
दो बार 1956 और 1966 में गणतंत्र दिवस परेड दिल्ली में इंद्रमणि बडोनी जी के निर्देशन में पहाड़ का ढोल लेकर केदार नृत्य की प्रस्तुति पर लोक जागर और पंवाड़ा गायन व ढोल वादन करने वाले 84 वर्षीय शिवजनी, उनकी पत्नी 83 वर्षीय गजला देवी और सहयोगी 80 वर्षीय गिराज ने आखिर हमारा निवेदन स्वीकार कर लिया।
टिहरी जिले के ढुंग बजियाल गांव के जंगल की छनियों में निवास करने वाले इन महान लोक कलाकारों ने नई टिहरी आकर आज की पीढ़ी को केदार नृत्य सिखाना शुरू कर दिया है। कोशिश कर रहे हैं कि कार्यशाला का विस्तार वीरभड़ माधो सिंह भंडारी नृत्य नाटिका तक आगे बढ़ाया जाए। सुरगंगा संगीत विद्यालय में कार्यशाला शुरू हो गई है।
केदार नृत्य की विधा अब प्रायः लुप्त हो गई है। इसी नृत्य पर 1956 में गणतंत्र दिवस पर प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु तक को थिरकने को प्रेरित कर दिया था। तब पूरे देश में इस नृत्य की प्रस्तुति दूसरी सर्वश्रेष्ठ आंकी गई थी। शिवजनी तब 20 वर्षीय युवा थे। साथ में लोकनृत्य में प्रवीण 19 वर्षीय पत्नी गजला देवी भी थी। 1966 में फिर से इस टीम को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली आमंत्रित किया गया। तब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को टीम ने पहाड़ की महिलाओं का गहना तिमण्या पहना दिया था। इस टीम के 26 सदस्यों में अब मात्र दो तीन लोग मौजूद हैं।
जल्दी ही हम नई टिहरी में अद्भुत केदार नृत्य की सार्वजनिक प्रस्तुति कर पाएंगे ………….

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