क्या-बकरीद पर खाए जाने वाले मीट की भी जांच होनी चाहिए ।

महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्‍ता राजपुरोहित ने कहा ‘यह भी तय करना चाहिए कि आखिर यह मीट कबका है, इसकी भी जानकारी दी जानी चाहिए.’

मुंबई, (राजीव रंजन सिंह) : उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से बकरीद के दौरान साफ-सफाई और खून के धब्बे हर जगह नहीं बिखराने को लेकर दिए गए निर्देश के बाद महाराष्ट्र बीजेपी और एफएसएसएआई भी इस बात पर जोर दे रहा है कि कुर्बानी के लिए इस्तेमाल बकरों की जांच सहित मीट की भी जांच होनी चाहिए. यह निर्देश होना चाहिए कि आखिर मीट कितने दिन पुराना है. खाने से कोई नुकसान तो नहीं.

यह सवाल सरकारी एजेंसी सहित सत्ताधारी दल के प्रवक्ता के जरिए उठाए गए हैं कि जब मंदिरों के प्रसाद पर एफडीए की नजर हो सकती है तो आखिर कुर्बानी में इस्तेमाल हजारों बकरों के, जिन्हें सैकड़ों और हजारों घरों में खाने में इस्तेमाल होगा इनकी जांच क्यों ना हो. हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने कुर्बानी के लिए गाइडलाइन जरूर जारी किया है कि इलाके की साफ-सफाई के साथ, खून के धब्बे सार्वजनिक ना हों और सड़कों पर गंदगी ना फैले.

महाराष्ट्र बीजेपी प्रवक्ता ने जरूर इस बात का ख्याल रखकर अपनी बात रखी है कि ये बात भले ही धार्मिक भावना से जुड़ा है. लेकिन साफ-सफाई रखने और अगर कोई भी वस्तु किसी को खाने के लिए देते हैं तो उसके बारे में विस्तार से जानकारी भी देना जरूरी है. कहीं ऐसा ना हो कि इसे खाने वाला बीमारी का शिकार हो.

महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्‍ता राजपुरोहित ने कहा ‘कुर्बानी दी जाती है और उसका खून चारों तरफ फैलता है. कुर्बानी में इस्तेमाल किए गए बकरे का मीट कई जगहों पर बांटा जाता है तो यह भी तय करना चाहिए कि आखिर यह मीट कबका है, इसकी भी जानकारी दी जानी चाहिए.
नियमों के तहत किसी भी कत्लखाने को साफ सफाई और दूसरे मानकों पर खरे उतरने के लिए एपएसएसएआई के तय नियमों के तहत काम करना होता है. इसमें अवशिष्ट का निस्पादन, रखरखाव और काम करने की सारी स्थितियों को देखकर ही लाइसेंस दिया जाता है. इसका पालन कराने का जिम्मा महानगर पालिका और राज्य सरकार का है. हालांकि FDA इस मामले से किनारा करने की कोशिश कर रहा है.

वहीं एफएसएसएआई इस मामले में ज्यादा एहतियात बरतते हुए नियमों के मुताबिक कत्लखाने से निकलने वाले हर मीट पर तारीख और सारा विवरण तय होता है उसी तरह से कुर्बानी के मीट का भी विवरण देना जरूरी होना चाहिए. वहीं एफएसएसएआई के डिप्‍टी डायरेक्‍टर (पश्चिम क्षेत्र) केयू मेथेकर ने बताया कि जितने भी स्लॅाटर हाउस हैं उनको नियमों का पालन करना है. इन नियमों को पालन कराने के लिए एफडीए की जिम्मेदारी होती है और राज्य सरकार भी इसे पालन करवा सकता है.

हालांकि इस मामले को जल्द ही गंभीरता से लेने के लिए जांच एजेंसियां तैयारी कर रही हैं. लेकिन एजेंसियों के पास जांच के लिए अधिकारियों की कमी सहित मामला धार्मिक भावना से जुडे होने के लिए मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. हालांकि अदालत में इस मामले को लेकर कई जनहित याचिका भी दाखिल की गई हैं. लेकिन अभी तक इस मामले पर कोई ठोस नतीजे नहीं निकले हैं.

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