पर्वतीय क्षेत्र में बिखरी जोत को देखते हुए चकबंदी की बात लंबे समय से उठती रही है, मगर भू-अभिलेख अपडेट न होने, आपसी सहमति न बन पाने समेत अन्य कारणों की वजह से यह मुहिम आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि, राज्य में चकबंदी अधिनियम है, लेकिन चकबंदी की व्यवस्था संपूर्ण हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जिलों के अलावा देहरादून, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और चंपावत के मैदानी क्षेत्रों तक ही सिमटी है।

सरकार ने पर्वतीय क्षेत्र के लिए स्वैच्छिक चकबंदी का ऐलान करने के साथ ही कुछ गांवों में चकबंदी की, मगर मुहिम, नियमावली के अभाव समेत अन्य कारणों से तेजी नहीं पकड़ पाई।

चकबंदी के तहत जहां बिखरी जोत का संयोजन हो सकेगा, वहीं आपसी सहमति से भूमि का बंटवारा होने पर कृषि में श्रम और समय की बचत भी होगी। यही नहीं, भूलेखों का दुरुस्तीकरण भी किया जाएगा।

अभी तक पर्वतीय क्षेत्र में गोल खाते ही अस्तित्व में हैं, जिसमें पांचवीं पीढ़ी से नाम चले आ रहे हैं। अब इसका दुरुस्तीकरण कर गोल खातों में हिस्सेदारी तय की जाएगी। इससे भूमि संबंधी विवाद नहीं होंगे। चकबंदी होने पर एक व्यक्ति को उसके हिस्से की जितनी जमीन है, वह एक जगह पर दी जाएगी। यदि खेतों और घर के बीच दूरी अधिक है तो ऐसे मामलों में विनिमय भी किया जा सकता है।

चकबंदी, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की बिखरी जोतों को एक करने का, ताकि किसानों को एक ही स्थान पर खेती योग्य बड़ी जोत मिल सके। हिमाचल व सिक्किम जैसे पर्वतीय राज्यों की सलाह ली गई। विधानसभा में विधेयक तक पारित हुआ। अफसोस चार साल बाद आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी एक सपना बनकर ही रह गई है। नतीजा, जिस पलायन को रोकने के लिए यह योजना बनाई गई थी, वह अभी तक बदस्तूर जारी है। दरअसल, प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में सदन में भूमि चकबंदी एवं भूमि-व्यवस्था विधेयक पारित किया। इसमें देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर को छोड़ शेष नौ जिलों को शामिल किया गया। कृषि, उद्यानीकरण व पशुपालन की जमीन को भी इसके दायरे में लाने का निर्णय लिया गया। इससे पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की उम्मीदें परवान चढ़ी कि अब वे एक बड़ी जोत में खेती कर सकेंगे।

प्रदेश सरकार ने 2022 तक किसानों की दोगुनी आय करने का संकल्प लिया है, लेकिन पहाड़ों में बिखरी कृषि जोत पर किसानों की आय बढ़ाना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार को चकबंदी पर फोकस करना चाहिए।

जिससे किसान एक ही जगह पर क्लस्टर खेती अपनाकर फसलों की पैदावार को बढ़ा सकें। चकबंदी से किसान को कृषि कार्य पर कम मेहनत करनी पड़ेगी और फसलों की देखभाल भी अच्छी तरह से हो सकेगी। इस आवाज को हम सबको मिलकर उठाना होगा साथ ही इस पर अमल भी करना होगा आपसी प्यार और सहमति के साथ चकबंदी विकास की अहम भूमिका बनेगी।

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