राज्य का नाम उत्तराखंड से बदलकर देहरादून ही कर दो।

राज्य का नाम उत्तराखंड से बदलकर देहरादून ही कर दो।पर्वतीय राज्य होने के बाद भी विकास हुआ तो सिर्फ मैदानी और तराई का पहाड़ की स्थिति और खराब हुई।जहाँ राज्य पलायन नाम की बीमारी से जूझ रहा है।स्वास्थ्य, शिक्षा,रोजगार पर ध्यान न देते हुये। VIP लोगों की फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया जाता हैं। उत्तराखंड में सत्ता बदलते ही नेताओं के चेहरे बदल जाते हैं बाकी की स्थिति वैसे ही रहती है पहाड़ में छोटे-छोटे बच्चों को बाघ उठा ले जाता है न जाने कितनी माता बहने घास काटते हुए पहाड़ों से गिर जाती है ना उनके स्वास्थ्य की कोई सुविधा है ना उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम,जैसे तैसे 5,10km पैदल चलने के पढाई पूरी होती है। फिर बात आती रोजगार की तो आप सबको स्थिति पता ही है। जिस राज्य की माँग उत्तराखंड के विकास के लिए हुई उतराखण्डी तो पलायन कर गये। उतराखण्ड रह गया एकमात्र सत्ता सुख पाने का केन्द्र। पहाड़ में स्वास्थय सुविधाएँ का बुरा हाल है। छोटी-छोटी बीमारी के रैफर कर दिया जाता हैं।कई लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते है। एक गरीब कहाँ से लाऐगा पैसा। ना उसको सरकार ने शिक्षा के सुगम साधन दिये।ना रोजगार।
ऐसी सरकारे क्या चाहिये जो स्वास्थ्य,शिक्षा,रोजगार ना दे सके।
इतिहास गवाह है कि उत्तराखंडी हमेशा से ही देशभक्त रहा है और हमेशा रहेगा।
लेकिन भाइयों इसका मतलब यह नहीं कि हम इन राजनीतिक पार्टियों के चक्कर में अपने उत्तराखंड को पीछे धकेल दें किसी पार्टी के सदस्य होने से पहले याद रखें हमें उत्तराखंडी हैं। यह सब की स्थिति पलायन के कारण ही हुई है अगर उत्तराखंड से लोग प्यार नहीं करते तो आज यह स्थिति नहीं होती जब हम लोग एक नए राज्य में जाकर अब से अपनी नई जिंदगी बसा सकते हैं तो क्या हम अपने पुश्तैनी गांव में रहकर अपने हक की लड़ाई नहीं लड़ सकते थे बस हमे लोगों मे अभाव था तो एकता का।
mohit joshi

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