भीम लाल आर्य ,घनसाली के विधायक पाड़ी नहीं देहरादूण वाले हैं।

गंगा सफाई के लिये तमाम दावे भले ही किये जा रहे हों लेकिन टिहरी झील में पसरी गंदगी को देख कर ऐसा नही लगता कि सफाई को लेकर कोई काम किया जा रहा है। पानी से लबालब भरी झील के किनारों पर इन दिनों हजारों टन की गंदगी पसरी हुई है।

पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने भी बालगंगा और भिलंगना के संगम गणेश प्रयाग पर फैली गन्दगी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नमामी गंगे योजना पर तंज कसते हुवे कहा कि गंगा जब अपने मायके से ही दूसित हो रही है और उसको भी साफ नही किया जा रहा है तो ऐसी कोरी योजनाओं का फायदा क्या है।वहीं भीम लाल आर्य ने कहा है कि स्थानीय विधायक को अपने घर में ही गंदगी नजर नहीं आती है तो उनकी सरकार के स्वच्छ अभियान के दावे कितने खोखले हैं । साथ ही उन्होंने कहा आसन सुध होना चये तभी मंत्र सुध होंगे । आर्य ने आगे कहा है कि शायद स्थानीय विधायक पाड़ी न होकर के देहरादूण वाले हो गए हैं इसलिए उन्हें इस गंदगी की बदबू महसूस नहीं होती है।विधायक अपनी विधानसभा के प्रति कितने संवेदनशील हैं 29 अगस्त को बालगंगा तेहशील के कोट गाँव में आयी आपदा में जहाँ एक ही परिवार के साथ लोग मलबे में दबने से हमेशा के लिए लिए चले गए और विधायक शक्ति लाल साह जी देहरादून में घंटों हेलीकॉप्टर की इन्तजारी कर रहे थे ऐसे समय पर तो आप अंदाजा लगा सकते हैं।

पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी टिहरी झील के गणेश प्रयाग में फैली गंदगी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि गंगा सफाई अभियान के ढोल पीटने से अच्छा ऐसे स्थानों पर अभियान चलाया जाय और क्षेत्र में जो महामारी फैलने की स्थिति उत्पन्न हो रखी है उसको तुरंत साफ किया जाना चाहिए।

आपको बता दें यंहा पर तमाम तरह का कचरा तो है ही साथ में सेकड़ों मवेशियों के शवों के साथ – साथ कई अधजले शव भी सड़ी गली हालत में तैर रहे हैं। ऐसे में झील के किनारों पर त्वरित सफाई नही की गई तों आस पास के कई गांवों में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।यही नही नई टिहरी की करीव 45 हजार की आवादी भी इसी झील का पानी पीती है ऐसे में इस पानी के दूषित होने का खतरा भी पैदा होगा। दरअसल जैसे- जैसे झील का जलस्तर बढ़ता है वैसे वैसे किनारों पर गाद और कचरा इकटठा होने लगता है, इस कचरे में उपरी तरफ से बही गन्दगी और मरे हुये पालतू व जंगली जानवरों के शव और झील किनारे घाटों की व्यवस्था न होने से अधजले शव भी इकटठे हो जाते हैं। ऐसे में सफाई की व्यवस्था की जानी जरूरी है।

डॉक्टर नरेंद्र डंगवाल का कहना है कि टिहरी झील के बाल गंगा और भिलंगना के संगम गणेश प्रयाग जो संगम है उस संगम पर बसंत पंचमी और गणेश चतुर्दशी को पूरे क्षेत्र की जनता गंगा स्नान करने जाती है लेकिन इस बार जब क्षेत्रीय जनता गंगा स्नान करने पहुंची तो देखा झील में गाय भैंस सूअर जंगली जानवर अधजली लावारिस लाशें सड़ रही है और उन्हें मछलियां नोच नोच कर खा रही हैं और 3 किलोमीटर के दायरे तक झील के दोनों ओर बदबू फैल रखी है
आज उस संगम के जो हालात हैं इन हालातों से आसपास के सटे गांव में महामारी फैलने की स्थिति उत्पन्न हो गई है
साथी उन्होंने कहा झील से लगभग डेढ़ सौ मीटर दूर बालगंगा महाविद्यालय भी है और नमामि गंगे योजना के अंतर्गत सरकार के द्वारा अरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन हरिद्वार से महज डेढ़ सौ किलोमीटर दूर और घनसाली से 3 किलोमीटर आगे गणेश प्रयाग नामक स्थल है और इस स्थल के हालात आज ऐसे हैं कि कभी भी महामारी फैल सकती है तो फिर ऋषिकेश हरिद्वार इलाहाबाद जैसे उदगम स्थल कहां से साफ हैं केंद्र सरकार को ध्यान देना होगा और नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत ऐसे स्थलों का सुधारीकरण करना होगा वरना वह दिन दूर नहीं जब पूरे क्षेत्र में महामारी फैल जाएगी।

झील के किनारों पर लगी गन्दगी के अम्बार पर डीएम टिहरी सोनिका का कहना है कि टीएचडीसी और एसडीएम को निर्देश दिये गये हैं तुरंत ही सफाई की जाएगी।


टिहरी बाँध के आगे भले ही देश दुनिया या फिर कारपोरेट नत्मस्तक हो लेकिन इसके जलागम क्षेत्र में रहने वाले लोगों और इस बाँध के लिए अपना पुस्तेनि घर,खेत खलियान सब कुछ गँवा देने वाले लोगों के लिए यह किसी अभीसाप से कम नहीं है जिस टिहरी बाँध के पीछे सत्ता प्रतिष्ठान ने लोगों को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए आज वही टिहरी बाँध को बनाने में पूर्ण सहयोग देने वाले लोगों के लिए अभिसाप साबित हो रहा है
राज्य सरकार और टीएचडीसी टिहरी बाँध परवाहितों की समस्याओं के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

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