उत्तराखंड राजनीति के खिलाड़ी जिन्हें कहा जाता है वो हैं हरीश रावत जिन्होंने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी की सुरुवात की केंद्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री का सफर और वर्तमान समय में कांग्रेस कमेटी के महासचिव पद
पुत्र को टिकट न मिलने से नाराज हरदा ने छोड़ी कॉंग्रेस लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका उत्तराखंड कॉंग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड में लगातार चल रही गुटबाजी और अपने पुत्र आनंद रावत कोटी कितना मिलने से आहत होकर कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है
उन्होंने दिल्ली में अमित शाह के समक्ष भाजपा का दामन थाम लिया । उन्होंने कॉंग्रेस और राहुल गांधी को कोसते हुए कहा है कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना कॉंग्रेस की बड़ी भूल है।
अब इसका खामियाजा कॉंग्रेस को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। अपने अंदाज को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले हरदा पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार ने कांगरे स्कोर 2019 लोकसभा चुनाव के ऐन वक्त पर बीती रात को बड़ा झटका दिया है।
आपको बता दें कॉंग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खासे परेशान थे। इस गुटबाजी को कम करने के लिए हाईकमान लगातार प्रयास भी कर रहा था। लेकिन बात नहीं बनी। हाल ही में देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में राहुल गांधी की परिवर्तन रैली हुई थी इस रैली में भी हरीश रावत ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे । हालांकि इस रैली में हरीश रावत समित जरूर हुए थे लेकिन इनका वह जोश व उत्साह इस रैली में कार्यकर्ताओं को उस तरीके से देखने को नहीं मिला जिस पर जिस चिर परिचित अंदाज के लिए हरीश रावत जाने जाते हैं रैली के तुरंत बाद हमेशा से सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले हरीश रावत ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्विट भी किया था कि वह लोकसभा चुनाव के लिए उत्साहित नहीं है। इसका सीधा मतलब निकाला जा रहा था कि हरीश रावत पार्टी में चल रही गुड बाजी से खुश नहीं है । उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में कांग्रेसी पिछले लंबे समय से गुटबाजी से जूझ रही है। उत्तराखंड में कांग्रेसी एक नहीं बल्कि कई गुट बने हुए हैं। इसी गुटबाजी के चलते नेता अपने अलग कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। गुटबाजी इतनी बढ़ गई है कि कुछ नेता प्रदेश अध्यक्ष को सुनने को भी तैयार नहीं है । पार्टी हाईकमान लेवल की अगर बात करें तो हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ,इंदिरा हृदयेश, किशोर उपाध्याय , के गुट की चर्चा समय-समय पर होती रहती है। पिछले दिनों जब हरीश रावत ने हरिद्वार से टिकट की मांग की तो इसपर पार्टी के ही नेताओं ने एतराज जता दी जिसको लेकर हरदा खेमें में खासी नराजगी थी ।इसके बाद उन्होंने नई पीढ़ी को आगे करने की बात करते हुए अपने पुत्र आनन्द रावत को आगे कर दिया था। आनन्द रावत नैनीताल लोकसभा शीट से चुनाव लड़ने को लेकर दावेदारी की लेकिन गुटबाजी के चलते उनका नाम पैनल में नहीं भेजा गया। जिसको लेकर उत्तराखंड की राजनीति के चाणक्य हरीश रावत आहत चल रहे थे।अब इन दिनों तराई क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश,की गुटबाजी भी जगजाहिर हो चुकी है।इसी गुटबाजी से आहत होकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत होली के पर्व पर अमित शाह के दिल्ली स्थित आवास पर होली मिलन समारोह कार्यक्रम में देर रात्रि कॉंग्रेस छोड़ बीजेपी के रंग में रंग गए हैं अमित शाह ने होली के इस पावन पर्व पर हरीश रावत को गले लगा कर होली की बधाई दी और पार्टी में उनका स्वागत किया अमित थाने होली के इस पावन पर्व पर हरीश रावत को गले लगाकर कुली की बधाई दी और पार्टी में उनका स्वागत किया इस दौरान हरीश रावत ने कहा वहा लम्बे समय से कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और गुटबाजी थी।आगे हरीश रावत ने कहा राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना भी कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल थी यह भूल कांग्रेस को भी मेरी तरह भारी पड़ेगी उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जब दल बदल करके हमारे कुछ साथी बीजेपी में गये थे उस समय मुझे बहुमत सिद्ध करने के बाद तुरंत चुनाव में जाना चाहिए था जो जो मेरी सबसे बड़ी भूल थी ।

पाठकों ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं , बुरा न मानों होली है ।

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