एक पहाड़ी युवा, पहाड़ में रहकर ही पहाड़ की परिभाषा को विश्व पटल पर रख प्रचारित व प्रसारित कर रहा है.

एक पहाड़ी युवा, पहाड़ में रहकर ही पहाड़ की परिभाषा को विश्व पटल पर रख प्रचारित व प्रसारित कर रहा है. आज हम बात कर रहे हैं श्री सिद्धान्त उनियाल की, जो वर्तमान में पेशे से पत्रकार हैं. बचपन से ही पहाड़ में पले बढ़े श्री उनियाल की शिक्षा दीक्षा पहाड़ में ही हुई. पहाड़ में रोजगार करना अपना सौभाग्य समझा. पत्रकार को अपना पेशा बनाकर पहाड़ को जनमानस तक पहुँचाया, चाहे उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिर हो, पहाड़ के ऐसे युवा जिन्होनें पलायन पर रोक लगाई, जिन्होनें स्वरोजगार को अपनाया, आदि पर लेख लिख जनमानस तक पहुँचाया. अपनी लेखन कला से उत्तराखंड की संस्कृति को भी उजागर किया.

 

गाँव से होते पलायन, उजड़ते मकान, उत्तराखंड के मेले, आदि पर लेख /समाचार प्रकाशित किया. इनके द्वारा अनेकों विषयों पर अपना लेख प्रकाशित किया, जिनमें से मशरूम के उत्पादन से स्वरोजगार को अपनाने वाली सोनी बिष्ट, बंजर पड़े गाँव, मंदिर, पर्यटन, किसी व्यक्ति के हुनर पर लेख आदि मुख्य है. इन्होनें ही सोनी बिष्ट के बारे में जानकारी प्रदान कर इनके प्रयास को जन जन तक पहुंचाया. पौड़ी गढ़वाल के ही दो सगे भाई जो विदेश की नौकरी को छोड़कर गाँव में खेती कर पलायन को रोकने में प्रयासरत है, इन भाईयों की जानकारी भी जनमानस तक इन्होंने ही पहुँचाया, जिस कारण उत्तराखंड सरकार ने इन भाइयों के इस प्रयास को सराहा और इन्हें सम्मानित किया. जसपाल रमोला, जो लकड़ियों को तराशकर मूर्ति का रूप देते हैं, पहाड़ में पर्यटन की संभावना, पौड़ी गढ़वाल के प्राथमिक विद्यालय में गढ़वाली पाठ्यक्रम की जानकारी, पलायन के कारण युवाओं पर हो रहे असर और रोजगार, गढ़वाली त्योहार, आदि का उल्लेख कर प्रसारित किया. इन्होंने मनसार का मेला, जो राम, लक्ष्मण, सीता माता का मेला होता है, अपनी लेख से प्रचारित किया. इन जैसे व्यक्तियों के प्रयास से उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा इस स्थान पर भव्य मंदिर बनाने और इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए.
मित्रों पहाड़ के लिए कार्य तो अनेक लोग कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग जनमानस तक उनका प्रचार प्रसार कर उनके कार्यों को जन जन तक पहुंचाते हैं, जिससे कि जनमानस जागरूक और प्रोत्साहित होकर स्वयं ही आगे बढ़ दूसरों को भी प्रोत्साहित करने में मददगार साबित हो सके. ऐसे ही कुछ कार्य श्री उनियाल कर रहे हैं. पलायन जो एक ऐसा कलंक है, जिससे पहाड़ धीरे धीरे कुचला जा रहा है, किंतु श्री उनियाल जी जैसे भी कुछ लोग हैं, जो पहाड़ में रहकर ही पलायन के स्तर को गिरा रहे हैं और औरों के लिए भी प्रेरक का कार्य कर रहे हैं.
मित्रों हम बडुली प्रयास कर रहे हैं, जो भी अपने पहाड़ के लिए अपना जीवन न्यौछावर करते हैं, पलायन पर रोक लगाकर स्वरोजगार अथवा पहाड़ पर ही रोजगार करते हैं, उनके बारे में जानकारी प्रकाशित कर सभी जनमानस को जागरूक करना है ताकि पलायन की आड़ में गाँव खाली ना हो और गाँव जीवंत बने रहे.

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