हम सबको इस परिवार को पुनः खड़ा करने के लिए सद्भाव, सौहार्द के साथ सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

ग्राम रिंगाल गढ़ का जग्गी दास बाजगी का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए अपने बाप-दादा की ही तरह ढोल पर थाप देता है।
उम्मीदों व आशा से भरपूर उसकी आँखों ने बच्चों को पढ़ा-लिखा कुछ बनाने के सपने सँजोये। सपनों को साकार करने के लिए अपने मूल गांव से आकर जड़ीगला (मरोड़ा) में किसी तरह जमीन लेकर मकान बनाने की तैयारी शुरू की। इस बीच टीन की झोपड़ी बना भविष्य संवारने की तैयारी शुरू ही कि थी कि कल रात अज्ञात कारण से उसका घर जलकर स्वाह हो गया। शुक्र यह रहा कि वह कल सपरिवार अन्यत्र किसी परिचित के घर रात्रिवास के लिए गया हुआ था। सुबह घर राख के ढेर में तब्दील हो चुका था। घर में रखे कपड़े, चारपाई, बिस्तर, सन्दूक आदि के साथ ही मकान के लिंटर डालने के लिए नकद राशि जो उसने थोड़ा थोड़ा कर जोड़ी, साथ ही रिस्तेदारों, परिचितों से उधार ले जमा की थी सब भस्म हो गया।घर में भोजन की व्यवस्था के लिए अब उसके पास न आटा-चावल है न दाल-सब्जी। पत्नी के सुख की खातिर जो गैस सिलेंडर व चूल्हा था वह भी कूड़े में तब्दील हो गया। पूंजी, सामान, नकद राशि आदि के भस्म होने के साथ ही उसकी आँखों में परिवार को लेकर पल रहे सपने भी मरणासन्न होंगे।
ऐसी घड़ी में हम सरकार, शासन-प्रशासन से मांग करते हैं कि जीवन की जदोजहद में लगे इस परिवार को यथा शीघ्र सरकारी मदद मुहैय्या कराई जाए। साथ ही हम सबको इस परिवार को पुनः खड़ा करने के लिए सद्भाव, सौहार्द के साथ सहायता के लिए आगे आना चाहिए। जो भी साथी सहयोग के इच्छुक हों कृपया सम्पर्क करने का कष्ट करेंगे।
– *अखिलेश उनियाल*
पूर्व सदय, जिला पंचायत, टिहरी गढ़वाल

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