प्रदूषण जांच की मार , सुबह 4 बजे से कतार ( after new MV act

केन्द्र सरकार के नये व्हीकल एक्ट के लागू करने के बाद जहाँ एक तरफ तमाम ट्रांसपोर्टर्स नाराज़ हैं तो दूसरी तरफ आम आदमी  सड़कों पर आ गया है , कोई आधी रात के 2 बजे से सड़क पर लाइन लगाय खड़ा है तो कोई सुबह के 4 बजे से , हालात ऐसे हैं जिसने 2014 में लगी  एटीएम के सामने लंबी लंबी लाइनो की याद दिला दी है… जी हां …ये लाइन लगी हैं उन लोगों की जिनके वाहनों के कागजात दुरुस्त नही हैं …ये सड़कों पर लगने वाली लंबी लाइन वाहनों के प्रदूषण के प्रमाण पत्र बनाने के लिए है , जिसमें कम से कम 10 घन्टे के लंबे इंतजार के बाद ही लोग सफल हो पा रहे हैं ..नया व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लोग अपने वाहनों के तमाम कागजात दुरुस्त करवाने में लगे हैं और इसमें सबसे मुख्य रूप से है वाहनों के प्रदूषण के प्रमाणपत्र जिनके लिये देहरादून में आधी रात से ही लोग लाइन लगा कर खड़े हो रहे हैं ,
हालांकि उसके बाद भी नंबर आने में 8 से 10 घंटे का समय लग रहा है जो किसी सज़ा से कम नही …इसके लिये दोष सरकारी व्यवस्था का भी माना जा सकता है क्योंकि सिर्फ देहरादून शहर की ही बात करें तो लगभग 30 लाख के करीब वाहन इस शहर में चलते हैं और प्रदूषण केंद्र मात्र 19 ही हैं ऐसे में अफरातफरी जैसा माहौल होना लाजमी है ..
प्रदूषण सेंटर पर जाकर देखा तो पाया कि हालात हरतरफ जस के तस हैं कहीं कोई बदलाव नही , जिस तरफ देखो लाइन ही लाइन ..हालात अब ऐसे हो गए हैं कि अब पुलिस बल को प्रदूषण केंद्र पर ड्यूटी बजानी पड़ रही है जिससे किसी भी झगड़े फसाद से बचा जा सके , मगर जब हमने पुलिस से इस हालात के बारे में और व्यवस्था के बारे में जानना चाहा तो कैमरे से बचते नज़र आते पुलिस कर्मियों ने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया कि बस व्यवस्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं
जांच केंद्र पर लगी लंबी लंबी लाइनों की वजह से अब हर जगह टोकन सिस्टम को लागू किया गया है जिसे हर प्रदूषण केंद्र के गेट पर वाहन चालकों को दिया जा रहा है , उसी टोकन के माध्यम से वो पैसे भी दे रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार से किसी भी असुविधा से बचा जा सके , बाहर की लाइन में लगे व्यक्ति को गेट के अंदर टोकन देने के बाद भी उसकी मुश्किलें कम नही हो रही हैं बल्कि बाहर की लाइन के बाद अंदर एक और लाइन है जिसमे लगने के लिये टोकन का होना अति आवश्यक है
कुल मिलाकर बाहर की लाइन में 8 से 10 घन्टे और फिर लगभग 2से 3 घंटे गेट के अंदर की लाइन ..ऐसे में एक व्यक्ति को अपना प्रदूषण सर्टिफिकेट लेने के लिये लगभग 13 घंटे की लाइन में लगना है फिर चाहे धूप हो या बारिश
 जब वहाँ खड़े लोगों से बात की तो पता चला कि कई घंटों से खड़े हुए लोग भी कम दोषी नहीं हैं , बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने गाड़ी लेने के बाद कभी अपना वाहन प्रदूषण चैक ही नहीं करवाया ,जरूरत ही नही समझी
कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने सरकार के कदम को अच्छा तो बताया मगर साथ ही नसीहत भी दे डाली , इनका मानना है कि जब सरकार भारी जुर्माना ले रही है तो फिर हमको भी तो अधिकार है कि हम अच्छी और गड्ढा मुक्त सड़कों पर चल सकें ,
लाइन में लगे बुजुर्ग का कहना था कि कम से कम सरकार को कुछ ऐसा वक़्त जरूर देना चाहिए था जिससे हम तैयार हो सकें और तमाम जरूरी कागजात तैयार करवा सकें
आखिरकार जब हमने इन हालात से पहले होने वाले हालातों के बारे में जाना तो पता चला कि पहल पूरे महीने में 40 से 50 लोग ही प्रदूषण जांच केंद्र तक आते थे मगर आज ये संख्या सिर्फ 1 दिन में 500 के करीब है जिसकी वजह से पुलिस भी लगी हुई है ,
शुल्क के बारे में भी केंद्र संचालक ने बताया की पहले का कुल शुल्क 70 रुपये था मगर आज की तारीख में नया एक्ट के बाद ये शुल्क 100 रुपये है , इस 100 रुपये में हमको 30 रुपये प्रति  वाहन RTO में जमा करना होता है कुल मिलाकर अब सांस लेने की फुर्सत नही है .
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